शारदीय नवरात्रि 2021: मां चंद्रघंटा की कथा,जाप मंत्र, स्तुति मंत्र,आरती, प्रिय वस्तुएं

शारदीय नवरात्रि 2021: मां चंद्रघंटा की कथा,जाप मंत्र, स्तुति मंत्र,आरती, प्रिय वस्तुएं

इस पोस्ट में हम आप सभी को शारदीय नवरात्रि 2021 में मां चंद्रघंटा की पूजा तिथि कब है मां चंद्रघंटा का रूप वर्णन मां चंद्रघंटा के जाप मंत्र स्तुति मंत्र ध्यान मंत्र स्त्रोत पाठ आरती और कथा के बारे में विस्तार से बताएंगे।

इससे पहले हमने आपको शारदीय नवरात्र से जुड़ी जानकारी शारदीय नवरात्रि 2021 : कब है, क्यों मनाते हैं, शुभ मुहूर्त और नौ देवियों में से मां शैलपुत्री और मां ब्रह्मचारिणी के बारे में विस्तार से बताया है। आप इनके नामों पर क्लिक कर इनके बारे में जान सकते हैं।

शारदीय नवरात्रि 2021: मां चंद्रघंटा की कथा,जाप मंत्र, स्तुति मंत्र,आरती, प्रिय वस्तुएं

शारदीय नवरात्रि 2021 : मां चंद्रघंटा की पूजन तिथि

हिंदू धर्म के विशेष त्योहार नवरात्रि जिसे पूरे भारत में बहुत ही हर्षोल्लास उल्लास के साथ मनाया जाता है शारदीय नवरात्रि 2021 में मां चंद्रघंटा की पूजा अश्विन मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को है। जोकि इस बार 9 अक्टूबर 2021 को है।इस दिन मां की पूजा पूर्ण विधि विधान और शुभ मुहूर्त  में करने से भक्तों की हर मनोकामना बहुत ही जल्द पूर्ण हो जाती हैं।

मां चंद्रघंटा की पूजा करने से सांसारिक कष्टों से मुक्ति मिलती मिलती है और मानसिक और आध्यात्मिक भावनाओं को शांति मिलती है। माता के अलौकिक रूप का दर्शन करने से भक्तों को अलौकिक वस्तुओं का भी दर्शन और अलौकिक शक्तियों का आभास होता है।

जिस व्यक्ति को शुक्र ग्रह के अशुभ दोष हैं उन्हें माता की पूजा करने से शुक्र ग्रह के सभी अशोक दोष नष्ट हो जाते हैं माता का प्रिय रंग हरा है हरा रंग अर्थात आंखों को और मन को शांति देने वाला रंग होता है माता को दूध से बनी वस्तुएं और दूध अधिक प्रिय है इसलिए उन्हें दूध से बनी मिठाइयां और पकवान भोग में लगाने चाहिए माता को पुष्प में कमल अधिक प्रिय है इसलिए उन्हें पूजन में कमल के पुष्प का उपयोग करना चाहिए।

मां चंद्रघंटा की रूप वर्णन 

मां चंद्रघंटा का रूप बहुत ही तेजवान है इनका वाहन सिंह है माता के सिंह सवारी का अभिप्राय है कि माता दुष्टों को सिंह की भांति भयानक मृत्युदंड देती हैं। माता के मस्तक पर आधा चंद्र और घंटे का निशान है। इसी कारण से माता को चंद्रघंटा कहा जाता है। चंद्रघंटा का अर्थ है चंद्र के समान शीतल और घंटा के समान तीक्ष्ण। इस रूप में मां के दो रूप एक साथ देखने को मिलते हैं।

मां की छवि उनके 10 भुजाओं में अलग-अलग शस्त्रों के साथ सुशोभित करती है। माता के 10 भुजाओं में शस्त्र इस प्रकार हैं। त्रिशूल, गदा, धनुष, बाण, तलवार, कमल, रुद्राक्ष माला, ध्यान मुद्रा, कमंडल, और दसवीं भुजा से माता अपने भक्तों को आशीर्वाद दे रही हैं।

भक्तों द्वारा मां चंद्रघंटा की दर्शन कर लेने से उनका जीवन परम शांति दायक और कल्याणकारी हो जाता है।

मां चंद्रघंटा की जाप मंत्र 

ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चन्द्रघंटायै नमः


मां चंद्रघंटा की प्रार्थना

पिण्डज प्रवरारूढा चण्डकोपास्त्रकैर्युता।
प्रसादं तनुते मह्यम् चन्द्रघण्टेति विश्रुता ॥

 

मां चंद्रघंटा की स्तुतिमंत्र

या देवी सर्वभूतेषु माँ चन्द्रघण्टा रूपेण संस्थिता । नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः ॥

मां चंद्रघंटा की ध्यान मंत्र

वन्दे वाञ्छितलाभाय चन्द्रार्धकृतशेखराम्।
सिंहारूढा चन्द्रघण्टा यशस्विनीम् ॥
मणिपुर स्थिताम् तृतीय दुर्गा त्रिनेत्राम्।
खङ्ग, गदा, त्रिशूल, चापशर, पद्म कमण्डलु माला वराभीतकराम्॥
पटाम्बर परिधानां मृदुहास्या नानालङ्कार भूषिताम्। मञ्जीर, हार, केयूर, किङ्किणि, रत्नकुण्डल मण्डिताम॥
प्रफुल्ल वन्दना बिबाधारा कान्त कपोलाम् तुगम् कुचाम्।
कमनीयां लावण्यां क्षीणकटि नितम्बनीम्॥

मां चंद्रघंटा की कवच मंत्र 

रहस्यम् शृणु वक्ष्यामि शैवेशी कमलानने।
श्री चन्द्रघण्टास्य कवचम् सर्वसिद्धिदायकम् ॥
बिना न्यासम् बिना विनियोगम् बिना शापोध्दा बिना होमम्।
स्नानम शौचादि नास्ति श्रद्धामात्रेण सिद्धिदाम॥ कुशिष्याम् कुटिलाय वञ्चकाय निन्दकाय च। 
न दातव्यम् न दातव्यम् न दातव्यम् कदाचितम् ॥

मां चंद्रघंटा की स्त्रोत पाठ 

आपदुध्दारिणी त्वंहि आद्या शक्तिः शुभपराम्।
अणिमादि सिद्धिदात्री चन्द्रघण्टे प्रणमाम्यहम्॥
चन्द्रमुखी इष्ट दात्री इष्टम् मन्त्र स्वरूपिणीम्।
धनदात्री्री, आनन्ददात्री चन्द्रघण्टे प्रणमाम्यहम् ।। नानारूपधारिणी इच्छामयी ऐश्वर्यदायिनीम्। सौभाग्यारोग्यदायिनी चन्द्रघण्टे प्रणमाम्यहम्॥

मां चंद्रघंटा की आरती

जय माँ चन्द्रघण्टा सुख धाम। 
पूर्ण कीजो मेरे काम॥
चन्द्र समान तू शीतल दाती।
चन्द्र तेज किरणों में समाती॥ 
मन की मालक मन भाती हो ।
चन्द्रघण्टा तुम वर दाती हो ॥
सुन्दर भाव को लाने वाली।
हर संकट में बचाने वाली ॥
हर बुधवार को तुझे ध्याये ।
सन्मुख घी की ज्योत जलाएं ।
शीश झुका कहे मन की बाता।
पूर्ण आस करो जगदाता।।
कांची पुर स्थान तुम्हारा ।
करनाटिका में मान तुम्हारा।
नाम तेरा रटू महारानी।
भक्त की रक्षा करो भवानी ॥


मां चंद्रघंटा की कथा

पौराणिक कथाओं और धार्मिक ग्रंथों के अनुसार जब पूरे ब्रह्मांड में दैत्य राज महिषासुर का आतंक फैला था और प्रत्येक लोगों में जाकर सभी देवताओं को के साथ युद्ध करता था और अत्यधिक बलशाली होने के कारण वह देवताओं को परास्त कर उनका राजपाट उनसे छीन लिया करता था ऐसे ही एक युद्ध में उसने भगवान इंद्र को परास्त किया और इंद्रलोक को उनसे छीनकर उन्हें वहां से बाहर कर दिया।

देवराज इंद्र के साथ-सथ दत्तराज महिषासुर जल पवन देव अग्नि देव वरुण देव इत्यादि देवों को भी परास्त कर उन्हें बंदी बना लिया था। जिसके कारण प्रत्येक देवता बहुत ही परेशान और व्याकुल थे।

वे सभी अपनी समस्या को लेकर भगवान विष्णु भगवान ब्रह्मा भगवान शंकर के पास गए और दुखी मन से सारा वृत्तांत सुनाया जिसको सुनने के बाद तीनों देवताओं को अत्यधिक क्रोध आया उस क्रोध के तेज से एक अग्नि पुण्य निकला। तीनों अग्नि पुंज के आपस में मिलने से  एक नारी शक्ति अर्थात मा चंद्रघंटा की उत्पत्ति हुई।

माता को देखकर सभी देवताओं ने उनके आगे झुक कर उन्हें प्रणाम किया और उनकी आरती गाए इसके बाद एक-एक करके सभी देवताओं ने अपने-अपने एक एकस्त्र माता को भेंट किए। उनकी सवारी के लिए उन्हें एक सिंह भी भेंट किया और माता से महिषासुर का वध करने का आग्रह किया।

इसके बाद माता ने अपने भव्य रूप में महिषासुर युद्ध करने और उसका वध करने निकल गई।

माता और महिषासुर के मध्य कई वर्षों तक युद्ध चला अंततः मां चंद्रघंटा ने दैत्य राज महिषासुर का वध कर दिया।

Conclusion (निष्कर्ष):–

दोस्तों में ऐस है कि हमारे द्वारा दी गई जानकारी जैसे शारदीय नवरात्रि 2021 में मां चंद्रघंटा की पूजा तिथि कब है मां चंद्रघंटा का रूप वर्णन जाप मंत्र स्तुति मंत्र ध्यान मंत्र स्त्रोत पाठ मां चंद्रघंटा की आरती और कथा आपको सुंदर लगी । किसी भी सुझाव और टिप्पणी के लिए हमें कमेंट अवश्य करें।

धन्यवाद 

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