शारदीय नवरात्रि 2021: मां शैलपुत्री की कथा, जाप मंत्र, स्तुति मंत्र, आरती और प्रिय वस्तुएं

शारदीय नवरात्रि 2021: मां शैलपुत्री की कथा, जाप मंत्र, स्तुति मंत्र, आरती और प्रिय वस्तुएं

इस पोस्ट में शारदीय नवरात्रि 2021 में मां शैलपुत्री की पूजा किस दिन होगी मां शैलपुत्री की कथा मां शैलपुत्री की जाप मंत्र स्तुति मंत्र ध्यान मंत्र कवच मंत्र मां शैलपुत्री की आरती और मां शैलपुत्री की प्रिय वस्तुओं के बारे में जानकारी संग्रहित है।

इससे पहले हमने आपको शारदीय नवरात्रि 2021 : कब है, क्यों मनाते हैं, शुभ मुहूर्त के बारे में जानकारी दी है।


शारदीय नवरात्रि 2021: मां शैलपुत्री की कथा, जाप मंत्र, स्तुति मंत्र, आरती और प्रिय वस्तुएं

शारदीय नवरात्रि 2021 : मां शैलपुत्री की पूजन तिथि

नवरात्रि साल के 365 दिनों में नव सबसे पावन दिन होती है जिसमें जगत जननी मां जगदंबा के नव स्वरूपों को विधि विधान से पूजन अर्चन किया जाता है। और यह त्यौहार पूरे भारत में बहुत ही हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है।

नवरात्रि के 9 दिनों में सबसे प्रथम जगदंबा मां के स्वरूप मां शैलपुत्री की पूजा की जाती है। मां शैलपुत्री की पूजा अश्विन मास के शुक्ल पक्ष के प्रथम तिथि के शुभ मुहूर्त में माता के प्रिय वस्तु भोग फूल और वस्त्रों के साथ की जाती है जिससे हमारे दुख सारे दुख दूर होते हैं और हमारी मनोकामना पूर्ण हो जाती है।


मां शैलपुत्री का रूप वर्णन

मां शैलपुत्री का वाहन वृषभ है। इसलिए इन्हें वृषारूढ़ा के से भी जाना जाता है। माता के एक हाथ में त्रिशूल और दूसरे हाथ में कमल पुष्प विराजित होता है इनका मुख चंद्रमा की भांति चमकदार और तेजवान होता है। पर्वतराज के घर पर जन्म लेने के कारण इनकी पूजा करने से मन में स्थिरता आती हैं और वैवाहिक जीवन में सुख और शांति बनी रहती है।

मां शैलपुत्री को पीले रंग का वस्त्र बहुत ही प्रिय है और इन्हें गाय के घी से बने भोग जो सफेद रंग के हो वह बहुत पसंद है माता को पुष्पों में लाल रंग के गुड़हल के पुष्प बहुत ही प्रिय है। माता की मन से पूजा करने से चंद्रमा से जुड़े सभी दोष का निवारण होता है

मां शैलपुत्री का जाप मंत्र

ॐ ऐं ह्रीं क्लीं शैलपुत्र्यै नमः

 मां शैलपुत्री का स्तुति/ध्यान मंत्र:

वन्दे वांछितलाभाय चन्द्रार्धकृत शेखराम्। 
वृषारूढ़ा शूलधरां शैलपुत्री यशस्वनीम्॥
पूर्णेन्दु निभां गौरी मूलाधार स्थितां प्रथम दुर्गा त्रिनेत्राम्॥
पटाम्बर परिधानां रत्नाकिरीटा नामालंकार भूषिता।। 
प्रफुल्ल वंदना पल्लवाधरां कातंकपोलां तुग कुचाम्। 
कमनीयां लावण्यां स्नेमुखी क्षीणमध्यां नितम्बनीम्॥

मां शैलपुत्री का आरती:

शैलपुत्री मां बैल पर सवार करें देवता जय जयकार करें।
शिव शंकर की प्रिय भवानी। तेरी महिमा किसी ने ना जानी।
पार्वती तू उमा कहलावे। जो तुझे सिमरे सो सुख पावे।
ऋद्धि-सिद्धि परवान करे तू। दया करे धनवान करे तू।
सोमवार को शिव संग प्यारी। आरती तेरी जिसने उतारी।
उसकी सगरी आस पुजा दो। सगरे दुख तकलीफ मिला दो।
घी का सुंदर दीप जला के। गोला गरी का भोग लगा के।

मां शैलपुत्री का कवच मंत्र:

ओमकार: में शिरः पातु मूलाधार निवासिनी।
हींकारः पातु ललाटे बीजरूपा महेश्वरी॥
श्रींकार पातुं वदने लावाण्या महेश्वरी।
हुंकार पातु हदयं तारिणी शक्ति स्वघृत।
फट्कार पात सर्वांगे सर्व सिद्धि फलप्रदा।।

मां शैलपुत्री का स्रोत पाठ 

प्रथम दुर्गा त्वंहि भवसागरः तारणीम्।
धन ऐश्वर्य दायिनी शैलपुत्री प्रणमाभ्यम्॥
त्रिलोजननी त्वंहि परमानंद प्रदीयमान्।
सौभाग्यरोग्य दायनी शैलपुत्री प्रणमाभ्यहम्॥
चराचरेश्वरी त्वंहि महामोह: विनाशिन।
मुक्ति भुक्ति दायनीं शैलपुत्री प्रमनाम्यहम्॥

मां शैलपुत्री की कथा

एक बार ब्रह्मापुत्र प्रजापति दक्ष ने विशाल यज्ञ का आयोजन किया जिसमें उन्होंने ब्रह्मांड के सभी देवी देवताओं को आमंत्रित किया और उनका यज्ञ बाद उन्हें समर्पित किया परंतु प्रजापति दक्ष अपनी पुत्री देवी सती और उनके पति भगवान शिव शंकर को आमंत्रित नहीं किया।

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महर्षि नारद मुनि के द्वारा जब यह बात देवी सती को पता चली तो वह अपने पिता के यज्ञ में शामिल होने के लिए और अपने परिवारजनों से मिलने के लिए व्याकुल हो उठी और भगवान शिव शंकर के समक्ष जाकर उनसे कहा हमारे पिताजी ने ब्रह्मांड में सबसे बड़े यज्ञ का आयोजन किया है और उन्होंने सभी देवताओं को आमंत्रित किया है और उनका यज्ञ भाग उन्हें समर्पित किया है परंतु वे हमें और आपको निमंत्रण देना भूल गए हैं। वह हमारे पिता का घर है वहां हम बिना निमंत्रण के भी जा सकते हैं इसलिए हमें यज्ञ में जाना चाहिए। 

परंतु भगवान शंकर ने उन्हें समझाते हुए कहा देवी सती आपके पिताजी हमें निमंत्रण देना भूल नहीं गए हैं वह किसी कारण से तुम्हारे पिता प्रजापति दक्ष हमसे रूठ हो गए हैं और उन्होंने हमें यज्ञ में आमंत्रित नहीं किया है बिना निमंत्रण किसी के भी घर जाना चाहे वह अपने पिता का ही क्यों ना हो अच्छा नहीं होता है इसलिए हमें वहां जाना ठीक नहीं लग रहा है अतः देवी आप यज्ञ में जाने की जिद ना करें।

इतना सब कुछ कहने और समझाने के बाद भी देवी सती की व्याकुलता कम नहीं हुई।उन्होंने बार-बार आग्रह करके भगवान शिव शंकर को मना लिया और अपने पिता के यज्ञ में शामिल होने के लिए चली गई वहां पहुंचने के बाद उनकी माता के सिवाय किसी ने उनके और भगवान शिव के साथ अच्छा व्यवहार नहीं किया। और दोनों लोग का बहुत ही बुरे भले अपशब्द कहे और अत्यधिक अपमान किया।

अपना और भगवान शिव का अपमान न सह पाने के कारण माता सती ने आयोजित महायज्ञ के यज्ञ कुंड में अपने देह की आहुति देकर मृत्यु को प्राप्त किया और पुनर्जन्म में पर्वतराज हिमालय के घर उनकी पुत्री के रूप में जन्म लिया इस जन्म में देवी सती का नाम मां शैलपुत्री हुआ। मां शैलपुत्री को माता पार्वती के रूप में भी जाना जाता है।

Conclusion (निष्कर्ष):–

तुम तो हमें आशा है कि आप सभी को इस पोस्ट के माध्यम से बताई गई जानकारियां जैसे शारदीय नवरात्रि 2021 में मां शैलपुत्री की पूजा किस दिन होगी मां शैलपुत्री की कथा मां शैलपुत्री की जाप मंत्र स्तुति मंत्र ध्यान मंत्र कवच मंत्र मां शैलपुत्री की आरती और मां शैलपुत्री की प्रिय वस्तुओं के बारे में जानकर आपको अच्छा लगा । किसी भी तरह की बात को समझाने और हमें सुझाव देने के लिए हमें कमेंट अवश्य करें।

धन्यवाद 

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