कूर्म अवतार : भगवान विष्णु का कच्छप अवतार: हरि ने क्यों किया कछुए का रूप kurma Avatar

कूर्म अवतार: भगवान विष्णु का कूर्म अवतार: हरि ने क्यों किया कछुए का रूप kurma Avatar

श्री हरि भगवान विष्णु जो सृष्टि के पालनकरता है, इस पोस्ट के माध्यम से हम भगवान विष्णु के दशावतार में से एक उनके द्वितीय अवतार कच्छप अवतार (कूर्म अवतार) की बात करेंगे और जानेंगे कि उन्होंने यह अवतार क्यों और कब लिया था।

कूर्म अवतार ( kurma Avatar )

भगवान विष्णु के समस्त अवतारों में यह कूर्म अवतार बहुत ही प्रसिद्ध है जब भगवान विष्णु ने समुंद मंथन में अपना योगदान देने के लिए कूर्म, कछुए या कच्छप का रूप लिया था। कूर्म अवतार के कारण ही समुंद्र मंथन संभव हो पाया और समुद्र से देवी देवता और बहुमूल्य रत्नों साथ ही अमृत भी प्रकट हुआ।


कूर्म अवतार

वैशाख मास की पूर्णिमा को भगवान विष्णु के कूर्म अवतार कच्छप अवतार यानी की कूर्म जयंती का पर्व मनाया जाता है। हिंदू धार्मिक मान्यता अनुसार इसी तिथि को भगवान विष्णु ने कूर्म ( कछुए ) का अवतार लिया था 

कूर्म अवतार की कथा ( Story Of Kurma Avatar Of Lord Vishnu )

हिंदू धर्म ग्रंथ में वर्णित भगवान विष्णु के कूर्म अवतार की कथा इस प्रकार है_

एक समय की बात है महर्षि दुर्वासा देवताओं के राजा इंद्र से मिलने इंद्रलोक गए उस समय राजा इंद्र अपने एरावत हाथी पर बैठकर कहीं जाने ही वाले थे उन्हें इस प्रकार देखकर महा ऋषि दुर्वासा मंत्रमुग्ध हो गए। उन्होंने खुश होकर विनीत भाव से भगवान इंद्र को एक परिजात पुष्प की माला भेंट की। इंद्र ने माला तो ग्रहण कर ली परंतु खुद ना पहन कर उस पुष्प की माला को एरावत हाथी के मस्तक पर डाल दिया और चलने को तैयार हो गए। हाथी मद से उन्मत्त हो रहा था उसने पुष्प की माला को अपने  सूंड से खींच कर मसलते हुए फेंक दिया और पैरों से कुचल डाला । जिसको देखकर ऋषिवर दुर्वासा बहुत ही क्रोधित हो उठे। 

महर्षि दुर्वासा ने कहा "अरे मूर्ख तूने मेरी दी हुई माला का कुछ भी आदर नहीं किया। तुम लक्ष्मी से संपन्न हो इसलिए तुमने इन पुष्पों की माला का और मेरा अपमान किया। जाओ मैं तुम्हें श्राप देता हूं तुम और यह पूरी पृथ्वी लक्ष्मी विहीन हो जाएगी और तुम्हारा यह वैभव श्री हीन हो जाएगा।" इतना कहकर महर्षि दुर्वासा वहां से चल दिए। श्राप  के प्रभाव से सभी देवतागण और तीनो लोक श्री हीन हो गए।

कूर्म अवतार

इधर दैत्यराजा बलि के शासन में समस्त दानव राक्षस और दैत्य बहुत अधिक शक्तिशाली हो गए‌ थे क्योंकि उन्हें दैत्यों के गुरु शुक्राचार्य से महा शक्तियां प्राप्त हो गई थी। जिससे उन्होंने इंद्र की गद्दी पर हमला कर दिया और उन पर विजय प्राप्त की। क्योंकि महर्षि दुर्वासा के श्राप के कारण इंद्र शक्तिहीन हो गए थे तो उन पर विजय पाना राजा बलि के लिए बहुत आसान था।

 अब समस्त तीनों लोकों पर राजा बलि का ही शासन था। समस्त देवता त्राहिमाम करने लगे। देवताओं की शक्तियां क्षीण हो गई थी। शक्तिशाली दैत्यों और राक्षसों का मुकाबला करना कठिन हो गया था। सभी देवतागण मिलकर इंद्र के साथ श्री हरि भगवान विष्णु के पास गए और उनकी आराधना की और उनसे सहायता मांगी ।

तब उन्होंने बताया कि "समुद्र के धरातल में अमृत कलश और लक्ष्मी है आप लोग समुद्र मंथन करें जिससे अमृत कलश और लक्ष्मी दोनों प्राप्त होगी। समस्त देवता अमृत पान कर ले फिर राक्षसों से युद्ध करना और विजय प्राप्त करना आसान हो जाएगा।"

परंतु समुद्र मंथन अकेले देवताओं के बस की बात नहीं थी। उन्होंने आगे बताया की आप लोग असुरों को अमृत का प्रलोभन देकर उनके साथ संधि कर लें और दोनों पक्ष मिलकर समुद्र मंथन करें।

उन्होंने किसी प्रकार से तब दानवों को समुद्र मंथन साथ में करने के लिए मना लिया। समुद्र के मंथन के लिए मद्राचल पर्वत को मथनी और नागराज वासुकी को रस्सी बनाया गया। सांप के पूछ की तरफ देवता थे जबकि मुख की तरफ राक्षसों ने पकड़ रखा था।

समुद्र मंथन

समुद्र मंथन शुरू हुआ परंतु अथाह समुद्र की गहराई और मंदराचल पर्वत के अधिक भार के कारण पर्वत समुद्र के अंदर बैठा जा रहा था जिसस  मंथन में परेशानी हो रही थी।तब भगवान विष्णु ने कछुए( कच्छप, कूर्म ) का रूप लेकर अपने पीठ पर मदरांचल पर्वत का भार रख लिया और समुद्र मंथन में सहायता की। समुद्र मंथन सफल हुआ और उसमें से निकले 14 रत्नों में अमृत और श्री लक्ष्मी की भी प्राप्ति हुई। देवताओं ने अमृत का पान किया और सभी देवता अमर होकर दैत्यों को सामना किया । देवता इस युद्ध में विजय हुए और इन्द्र को पुनः गद्दी मिल गई और सृष्टि फिर से 'श्री' संपन्न हो गई।

यह थी भगवान विष्णु के कूर्म अवतार / कच्छप अवतार  की कथा।

This is mythological story of kurma Avatar of lord vishnu also known as kachchap Avatar (कच्छप अवतार) of lord vishnu .

कूर्म मंत्र Kurma Mantra 

।। ॐ कूर्माय नम: ।।

।। ॐ हां ग्रीं कूर्मासने बाधाम नाशय नाशय ।।

।। ॐ आं ह्रीं क्रों कूर्मासनाय नम: ।।

।। ॐ ह्रीं कूर्माय वास्तु पुरुषाय स्वाहा ।।

दोस्तों हमें आशा है कि आपको‌ कूर्म अवतार : भगवान विष्णु के कूर्म अवतार की कथा अच्छी लगी। किसी भी सुझाव के लिए हमें टिप्पणी भेजें।

धन्यवाद 

इसे भी पढ़े :-

अपनी राशि कैसे पता करे? जन्मतिथि से राशि जाने

श्रीरामचरितमानस के रोचक तथ्य

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

भोजन क्या है? सात्विक, राजसिक, तामसिक भोजन लिस्ट, लाभ और हानियां

नई जीमेल अकाउंट कैसे बनाये - Gmail login new account

अंतरिक्ष विज्ञान से जुड़े कुछ रोचक तथ्य: Difference between Rocket and Spacecraft