भगवान विष्णु के दस अवतार कौन से है? Dashavtar of Lord Vishnu

भगवान विष्णु के दस अवतार कौन से है?, Dashavtar of Lord Vishnu

इस पोस्ट के माध्यम से हम हिंदू धर्म के देवता श्री हरि भगवान विष्णु के दस अवतार (Dashavatar of lord Vishnu) और हरि विष्णुु ने  में आपको संपूर्ण जानकारी देंगे।

भगवान विष्णु के दशावतार

सनातन धर्म की मान्‍यताएं और विज्ञान के तर्क कहीं न कहीं किसी मोड़ पर आकर एक-दूसरे के पूरक ही साबित होते हैं। इसका एक योग्‍य उदाहरण है भगवान विष्‍णु के 10 अवतार श्रीहरि के इन अवतारों का संबंध विज्ञान से भी है। जी हां भगवान के ये दस अवतार मानव सभ्‍यता के विकास के क्रम को दर्शाते हैं। 

Dashavtar of Lord Vishnu : दशावतार

भगवान विष्णु हिन्दू त्रिदेवों (तीन महा देवताओं ब्रह्मा विष्णु शिव) में से एक हैं। ब्रह्मांड के निर्माण की योजना के अनुसार, वे ब्रह्माण्ड के निर्माण के बाद, उसके विघटन तक उसका संरक्षण करते हैं। भगवान विष्णु के दस अवतार को संयुक्त रूप से 'दशावतार' कहा जाता है।

श्री हरि विष्णु भगवान


जब इस संसार में धर्म की हानि होती है और अधर्म और अन्याय अपना पैर पसारने लगते हैं तब श्री हरि भगवान विष्णु अपने अलग-अलग रूपों में इस संसार में अवतरित होकर दुष्टों का नाश करते हैं और सज्जनों को सद्बुद्धि दे कर उन्हें आगे का रास्ता दिखाते हैंश्रीमद्भगवद्गीता में श्रीकृष्ण के द्वारा कहा गया है।

नैनं छिन्दन्ति शस्त्राणि नैनं दहति पावकः । 

न चैनं क्लेदयन्त्यापो न शोषयति मारुतः ।

अर्थात 

आत्मा को न शस्त्र काट सकती हैं, न आग उसे जला सकती है। न पानी उसे भिगो सकता है, न हवा उसे सुखा सकती है। (यहां भगवान श्रीकृष्ण ने आत्मा के अजर-अमर और शाश्वत होने की बात की है।) भगवान कृष्ण द्वारा खा गया यह श्लोक भगवान विष्णु के 10 अवतार को सार्थक करता है

यदा यदा ही धर्मस्य ग्लानिर्भवति भारत।

अभ्युथानम् अधर्मस्य तदात्मानं सृजाम्यहम्॥

परित्राणाय साधूनां विनाशाय च दुष्कृताम्।

धर्मसंस्थापनार्थाय संभवामि युगे-युगे॥

अर्थात

अर्थात् जब-जब धर्म की हानि और अधर्म का उत्थान हो जाता है, तब-तब सज्जनों के परित्राण और दुष्टों के विनाश के लिए मैं विभिन्न युगों में (माया का आश्रय लेकर) उत्पन्न होता हूँ।

Dashavtar of Lord Vishnu

हिन्दू धर्म मान्यताओं में भगवान विष्णु जगतपालक माने जाते हैं। धर्म की रक्षा के लिए हिन्दू धर्मग्रंथ श्रीमद्भागवतपुराण के मुताबिक सतयुग से लेकर कलियुग तक भगवान विष्णु के 24 अवतार माने गए है जिसमें से ये दस अवतार प्रमुख हैं -


भगवान विष्णु के सभी दस अवतार


1.  मत्स्य अवतार - (सतयुग) भगवान विष्णु ने मत्स्य यानी मछली के रूप में अवतार,जब इस संसार में युग परिवर्तन का महा प्रलय आया था तब उस युग के कुछ अनमोल वस्तु जीवजंतु वनस्पति के अंशो को लेकर दूसरे युग में प्रवेश करने के लिए लिया था।

2.  कूर्म अवतार - (सतयुग) भगवान विष्णु ने कूर्म यानी कछुए का अवतार, जब सभी देवता श्री लक्ष्मी के चले जाने और असुरों के उनके सिंहासन को छीन लेने के बाद भगवान विष्णु के ही कहने पर समुद्र मंथन करने के लिए तैयार हुए और उस मंथन में मंदराचल पर्वत समुद्र के अंदर प्रवेश करता जा रहा था तब कछुए का अवतार लेकर मंदराचल पर्वत को अपनी पीठ पर धारण करके समुद्र मंथन करने में सहायता की थी।

3.  वराह अवतार -(सतयुग) भगवान विष्णु ने वराह यानी सुअर का अवतार, जब पृथ्वी समुद्र के रसातल में डूबी हुई थी तब उसे वहां से बाहर निकालने के लिए ब्रह्मा जी के नाक के छिद्र से प्रकट हुए थे और पृथ्वी को अपने नुकीले दांतो के बीच फंसा कर पानी के अंदर से बाहर लाए थे।

4.  नरसिंह अवतार -(सतयुग) भगवान विष्णु के अर्ध मनुष्य और अर्ध सिंह यानी शेर का अवतार, जब हिरण्यकश्यप ने अपने पुत्र प्रहलाद पर कठोर अत्याचार किए और उसे मारने के अनेकों प्रयास किए जिसमें उसकी बहन होलिका की भी मृत्यु हो गई। प्रह्लाद ने भगवान विष्णु की स्तुति की और हिरण्यकश्यप के वरदान के कारण भगवान विष्णु ने नरसिंह का अवतार लेकर उसे मृत्युदंड दिया।

5.  वामन अवतार -(त्रेतायुग) भगवान विष्णु ने बौने ब्राह्मणके रूप में अवतार राजा बलि के अहंकार को खत्म करने के लिए लिया था। वामन अवतार में भगवान विष्णु ने दो पग में सारी सृष्टि को नाप लिया था और तीसरा पग राजा बलि के सर पर रख कर उसके अहंकार को खत्म किया था।

6.  परशुराम अवतार -(त्रेतायुग) भगवान विष्णु का यह छठा अवतार था जिसका उद्देश्य पृथ्वी पर से समस्त दुष्ट और अत्याचारी राजवंशों का नाश करना था। भगवान परशुराम सप्त चिरंजीवियो में से एक है, जो अभी भी पृथ्वी पर निवास करते है।मान्यता के अनुसार कलयुग में कल्कि अवतार को युद्ध कला की शिक्षा भगवान परशुराम ही देंगे।

7.  श्रीराम अवतार -(त्रेतायुग) भगवान विष्णु नेमर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम का अवतार  अधर्मी रावण को मारने और असत्य पर सत्य की जीत के लिए लिया था। जिसके माध्यम से उन्होंने बताया की कठिनाई कितनी भी हो पर अंत में असत्य पर सत्य की जीत होती है।

8.  श्रीकृष्ण अवतार -(द्वापर युग) भगवान विष्णु ने श्रीकृष्ण का अवतार जोकि 16 कलाओं के पूर्ण अवतार था, महाराजा कंस के पाप को खत्म करने और महाभारत में अधर्मीयों के नाश और धर्म की जीत  के लिए लिया था जिसके माध्यम से उन्होंने श्रीमद्भगवद्गीता जैसे महान ग्रंथ का ज्ञान दिया।

9.  बुद्ध अवतार -(कलयुुग) भगवान विष्णु ने भगवान बुध का अवतार पूरे संसार को क्षमा, शील और शांति टका पाठ पढ़ाने के लिए लिया था। इसके माध्यम से वह पूरे संसार को शांतिप्रिय बनाना चाहते थे।

10.  कल्कि अवतार -(कलयुुुुग) यह अवतार कलयुग के अंत में होना माना गया है इसमें प्रभु पृथ्वी की समस्त बुराइयों का नाश करके पुनः सतयुग की शुरुवात करेंगे।

conclusion 

हमें उम्मीद है कि भगवान विष्णु के 10 अवतार कौन से हैं? भगवान विष्णु का कौन सा अवतार किस युग में हुआ था तथा उनका उद्देश्य क्या था? समझ में आ गया होगा। आप कमेंट में अपने बहुमूल्य सुझाव और प्रतिक्रिया देना न भूलिएगा।

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