भगवान विष्णु के मत्स्य अवतार की कथा । Bhagwan Vishnu ke Avatar

भगवान विष्णु के मत्स्य अवतार की कथा

नमस्कार दोस्तों 

आज हम जानेंगे भगवान विष्णु जो इस सृष्टि के पालन करता करता है  और सृजन करता है उनके एक महत्वपूर्ण अवतार के बारे में। इस धरती पर जब भी कोई संकट आया है,तो भगवान विष्णु ने अपने अंश को भेजकर इस धरती को विनाश से बचाया है  आज हम भगवान विष्णु के 10 अवतारों में से एक मत्स्य अवतार की कथा  के बारे में जानेंगे। 

भगवान विष्णु के मत्स्य अवतार की कथा :
(Bhagwan Vishnu ke Avatar):

सतयुग में एक राजा सत्यव्रत धरती पर राज करते थे वह बहुत ही दयालु और बहुत ही दानी राजा थे।एक दिन प्रतिदिन की भांति वह सुबह के समय नदी में स्नान कर रहे थे। स्नान करने के बाद उन्होंने जैसे ही सूर्य को अर्घ्य देने के लिए नदी के जल में हाथ डालकर हाथ में जल लिया तो उन्हें डरी हुई और असहाय प्रतीत होती हुई एक आवाज सुनाई दी, वह अपने चारों तरफ देखने लगे लेकिन उनको कोई दिखाई नहीं दिया।

वह आश्चर्य में पड़ गए की यह  क्रंदन करती हुई आवाज कहां से आ रही है।तब उनकी नजर अपने हाथ में लिए हुऐ जल पर पड़ी उन्होंने देखा कि, उनके हाथ में एक छोटी सी मछली थी जो राजन को आवाज दे रही थी और उनसे अपनी जीवन की रक्षा करने के लिए कह रही थी। उसने राजा से कहा,"हे राजन आप मेरी रक्षा करें मैं छोटी सी जीव इस विशाल समुद्र में बड़े-बड़े जीवो के साथ रहती हूं मुझे हमेशा डर लगा रहता है कि विशालकाय समुद्री मछलियां और जीव मुझे हानि ना पहुंचा दें।" 

bhagwan vishnu ka avatar


तब राजा सत्यव्रत थोड़ी अहंकार की भावना से बोले,"आप को डरने की कोई आवश्यकता नहीं है आप जैसे तुच्छ जीव के लिए मेरे महल में बहुत सारी जगह है मैं आपको अपने महल में शरण देता हूं"और राजा उस मछली को लेकर अपने महल में आ गए वहां पर एक छोटे से सोने के पात्र में मछली को रख दिया। 

थोड़ी ही देर के बाद मछली अचानक से धीरे-धीरे बड़ी होने लगी। फिर उसने राजा को आवाज देकर बुलाया और कहां, "राजन यह पात्र मेरे लिए छोटा है मैं इसमें ठीक तरह से घूम भी नहीं पा रही मेरा आकार धीरे-धीरे बड़ा हो रहा है जिसकी वजह से मुझे बहुत परेशानी हो रही है"।

राजा को पात्र बदलना पड़ा नए पात्र में रखने के बाद उसमें भी मछली बड़ी हो गई फिर राजा ने महल के सबसे बड़े पात्र में मछली को रखा मछली उसमें भी बड़ी हो गई। अब राजा ने उस बड़ी मछली को समुद्र में डलवा दिया और कहा,"हे दिव्य मत्स्य आप कौन हैं किसी भी साधारण मत्स्य का आकार एक दिन में ही इतना बड़ा नहीं हो सकता है। हमने आपको तुच्छ जीव कहकर संबोधित किया इसके लिए हम क्षमा प्रार्थी हैं हम आप की लीला को पहचान नहीं पाए हे भगवन आप हमें दर्शन देकर हमारी जीवन को धन्य करें और हमें बताएं कि आप कौन हैं"। 

तब लीलाधर भगवान विष्णु मत्स्य रूप से अपने चतुर्भुज अवतार में प्रकट हुए और राजा से कहा,"राजा सत्यव्रत आज से सातवें दिन भूलोक सहित तीनों लोक समुद्र के प्रलय में डूब जाएंगे। जब तीनों  लोक प्रलय की जल राशि में डूबने लगेंगे तो मेरी प्रेरणा से तुम्हें एक बहुत बड़ी नौका प्राप्त होगी। तब तुम समस्त प्राणियों के सूक्ष्म शरीरों को, सप्तऋषियों को, औषधियों को, धान्य के बीजों को, को सभी वेदों को, और उन सभी वस्तुओं को जो नए जीवन के सृजन में सहायता करें, उसे लेकर उस नौका में बैठ जाना।

जब प्रचंड आंधी और समुद्री तूफान के कारण नौका डगमगाने लगेगी तब मैं इसी रूप में वहां आऊंगा और तुम लोग भगवान शिव के वासुकी नाग की सहायता से मेरी सींग को नाव में बांध देना और जब तक ब्रह्मा की रात रहेगी तब तक मैं इसी तरह समुद्र में सप्तर्षियों के साथ उसे खींचता हुआ विचरण करूंगा उस समय जब तुम मुझसे प्रश्न करोगे तब मैं तुम्हें सारे प्रश्नों का उत्तर दूंगा और तुम्हे ब्रह्म का ज्ञान दूंगा, वह तुम्हारे ह्रदय में प्रकट हो जाएगी और तुम मुझे ठीक-ठीक जान सकोगे।जब ब्रह्मा जी का दिन होगा और प्रलय समाप्त होगी उसके बाद हम सब नए युग में प्रवेश करेंगे जब उस युग का संचालन होगा तब उस युग में तुम मनु के रूप में जाने जाओगे और मनुअंतर तक सृष्टि का संचालन करोगे"। 

भगवान विष्णु के मत्स्य अवतार की कथा


इतना कहने के बाद भगवान विष्णु का मत्स्य अवतार वहां से अंतर्ध्यान हो गया। भगवान विष्णु के मत्स्य अवतार की बात सुनकर सत्यव्रत सभी सप्तर्षियों औषधियों धन्य के बीजों को लेकर एक पर्वत की सबसे ऊंची चोटी पर चले गए। जब 7 दिन बाद समुद्र का जल स्तर बढ़ने लगा और प्रलय आई तब सत्यव्रत ने वैसा ही किया जैसा भगवान विष्णु के मत्स्य अवतार ने उनसे कहा था। मत्स्य अवतार वहां पर प्रकट हुए राजा सत्यव्रत ने बासुकीनाग के पूछ को मछली के सिंह से बांध लिया। तब भगवान विष्णु के मत्स्य अवतार ने उन सभी की उस प्रलय से निकलने में और नए युग में प्रवेश करने में  सहायता की।

दोस्तों यह थी भगवान विष्णु के मत्स्य अवतार की कथा

Conclusion (निष्कर्ष ):-

भाइयों और बहनों आपको भगवान विष्णु के मत्स्य अवतार की कथा कैसी लगी आप अपनी राय हमें कमेंट करके अवश्य बताएं। अपने विचार हमारे साथ साझा करें।भगवान विष्णु के मत्स्य अवतार की कथा के बारे में कोई सुझाव हो तो हमें जरूर कमेंट करके बताएं।

धन्यवाद

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